अलीगढ़: जिला महिला अस्पताल में प्रसव के बाद छुट्टी मिली तो एक प्रसूता और उसके परिवार को सरकारी 102 एंबुलेंस सेवा से घर पहुंचने की उम्मीद थी। अस्पताल परिसर में छह एंबुलेंस खड़ी होने के बावजूद परिवार को समय पर घर पहुंचने के लिए निजी कार का सहारा लेना पड़ा। आरोप है कि करीब दो घंटे तक इंतजार के बाद भी उचित एंबुलेंस नहीं मिली, जिसके बाद पति ने ₹2,200 में किराये की कार बुलाई और पत्नी व नवजात को घर ले गया।
सीजेरियन डिलीवरी के बाद सड़क के झटकों का डर
देहली गेट निवासी कमल ने करीब एक सप्ताह पहले अपनी पत्नी राधा को प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। ऑपरेशन के बाद रविवार को उन्हें छुट्टी दे दी गई।
छुट्टी मिलने के बाद कमल ने पत्नी और नवजात को घर ले जाने के लिए 102 एंबुलेंस सेवा के कंट्रोल रूम पर फोन किया। अस्पताल परिसर में उस समय छह एंबुलेंस खड़ी थीं, लेकिन चालकों ने बताया कि कंट्रोल रूम से ड्यूटी आवंटित होने के बाद ही मरीज को ले जाया जा सकता है।
करीब आधे घंटे के इंतजार के बाद सातवीं एंबुलेंस अस्पताल पहुंची। पति ने जब वाहन के अंदर की व्यवस्था देखी तो उसमें स्ट्रेचर देखकर उसने पत्नी को ले जाने में आपत्ति जताई।
कमल का कहना था कि पत्नी की सीजेरियन डिलीवरी हुई है और टांके लगे हैं। ऐसे में खराब सड़कों और गड्ढों के बीच इस तरह ले जाने से उसे काफी परेशानी हो सकती है। आरोप है कि चालक की ओर से भी उचित समाधान नहीं दिया गया।
दो घंटे तक जमीन पर लेटी रही प्रसूता और नवजात
परिवार के मुताबिक, एंबुलेंस की व्यवस्था होने तक प्रसूता और उसका नवजात बच्चा करीब दो घंटे तक अस्पताल परिसर में रहे। छुट्टी के बाद स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं होने के कारण प्रसूता को इमरजेंसी के बाहर जमीन पर लिटाना पड़ा।
ऑपरेशन के टांकों के कारण वह पहले से ही दर्द में थी। ऐसे में जमीन पर लेटने की स्थिति ने परिवार की परेशानी और बढ़ा दी।
मजबूरी में ₹2,200 देकर किराये की कार बुलाई
जब सरकारी एंबुलेंस से सुरक्षित और आरामदायक तरीके से घर पहुंचने की व्यवस्था नहीं हो सकी तो कमल ने निजी कार किराये पर लेने का फैसला किया। इसके लिए उसे करीब ₹2,200 खर्च करने पड़े।
परिवार का आरोप है कि सरकारी निशुल्क एंबुलेंस सेवा उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें निजी वाहन पर पैसा खर्च करना पड़ा। इस घटना ने अस्पताल में मरीजों को छुट्टी के बाद मिलने वाली परिवहन सुविधा और एंबुलेंस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिवार ने मामले में उचित व्यवस्था और जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही तय किए जाने की मांग की है।

