नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सोशल मीडिया की सियासी जंग तेज होती दिखाई दे रही है। पिछले कुछ दिनों में बीजेपी की कई राज्य इकाइयों ने राहुल गांधी और कांग्रेस को निशाना बनाते हुए मीम्स, फिल्मी क्लिप और छोटे वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किए हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इन पोस्ट को अलग-अलग राज्य इकाइयों के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से साझा किया गया और कई पोस्ट में एक-दूसरे को टैग या रीपोस्ट भी किया गया।
यह अभियान ऐसे समय तेज हुआ है जब राहुल गांधी अपने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए युवाओं के बीच संवाद कर रहे हैं। इसी के समानांतर ‘झूठ की गूंज’ नाम की एक वेबसाइट सामने आई है, जो राहुल गांधी के विभिन्न कार्यक्रमों में किए गए दावों की तथ्य-जांच करने का दावा कर रही है। वेबसाइट के मुताबिक उसने चार कार्यक्रमों के 40 दावों की जांच की है, जिनमें 29 को ‘False’ और 11 को ‘Misleading’ रेट किया गया है।
‘छात्रों की गूंज’ के जवाब में ‘झूठ की गूंज’
राहुल गांधी ने पिछले कुछ महीनों में अलग-अलग शहरों में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम किए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस श्रृंखला में कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे के कार्यक्रम शामिल हैं।
इसके जवाब में सामने आई ‘झूठ की गूंज’ वेबसाइट ने इन चार कार्यक्रमों के कुल 40 दावों को सूचीबद्ध किया है। वेबसाइट का दावा है कि उसने प्रत्येक दावे के जवाब में संबंधित स्रोतों के आधार पर अपना निष्कर्ष दिया है और कुल 134 स्रोतों का इस्तेमाल किया है।
हालांकि, वेबसाइट द्वारा किसी दावे को ‘False’ या ‘Misleading’ बताना उस वेबसाइट का अपना आकलन है। इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य मानने से पहले प्रत्येक दावे और उसके आधार की अलग-अलग जांच जरूरी है।
कांग्रेस ने बीजेपी से जोड़ा वेबसाइट का संबंध
‘झूठ की गूंज’ सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं ने इसे बीजेपी के अभियान से जोड़कर निशाना साधा। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी के युवा संवाद कार्यक्रमों के जवाब में उनके खिलाफ डिजिटल अभियान चलाया जा रहा है।
वहीं, बीजेपी की ओर से इस आरोप को खारिज किया गया है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि ‘झूठ की गूंज’ से बीजेपी का कोई संबंध नहीं है। उनके मुताबिक, यह Gen Z क्रिएटर्स की ओर से बनाया गया प्लेटफॉर्म है और यदि कांग्रेस को वेबसाइट की ओर से किए गए फैक्ट-चेक पर आपत्ति है तो उसे तथ्यों के साथ जवाब देना चाहिए।
इस तरह वेबसाइट की पहचान और उसके राजनीतिक संबंधों को लेकर दोनों दलों के दावे अलग-अलग हैं। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर इसे सीधे बीजेपी का आधिकारिक प्लेटफॉर्म घोषित करना उचित नहीं होगा।
बीजेपी की राज्य इकाइयों ने फिल्मी क्लिप से साधा निशाना
पिछले कुछ दिनों में बीजेपी की अलग-अलग राज्य इकाइयों के सोशल मीडिया पोस्ट इस अभियान का सबसे चर्चित हिस्सा रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, कई पोस्ट में फिल्मों और वेब सीरीज की लोकप्रिय क्लिप का इस्तेमाल कर राहुल गांधी और कांग्रेस पर राजनीतिक कटाक्ष किए गए।
बीजेपी गोवा की ओर से ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की क्लिप का इस्तेमाल किया गया। महाराष्ट्र बीजेपी ने फिल्म ‘छावा’ की क्लिप साझा की। छत्तीसगढ़ बीजेपी ने ‘मिर्जापुर’ से जुड़ी क्लिप के जरिए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया।
इसी तरह गुजरात बीजेपी की पोस्ट में अजय देवगन और सलमान खान से जुड़ी फिल्मी छवियों का इस्तेमाल किया गया। जम्मू-कश्मीर बीजेपी और दिल्ली बीजेपी ने भी फिल्मी और वेब सीरीज क्लिप के जरिए अपने संदेश सोशल मीडिया पर साझा किए। कर्नाटक बीजेपी की ओर से ‘KGF’ की क्लिप इस्तेमाल किए जाने की भी रिपोर्ट है।
इन पोस्ट का साझा पहलू यह है कि लंबे राजनीतिक भाषणों की जगह कुछ सेकंड की लोकप्रिय वीडियो क्लिप और छोटे संदेशों के जरिए राहुल गांधी तथा कांग्रेस पर निशाना साधा गया।
‘दिमागी नक्सल’ बना नए अभियान का प्रमुख शब्द
बीजेपी के इस डिजिटल अभियान में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द भी प्रमुखता से सामने आया है। पार्टी की कुछ राज्य इकाइयों ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर हमला करते हुए इस शब्द का इस्तेमाल किया है।
हाल के दिनों में यह शब्द व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा बना है। RSS से जुड़े प्रकाशन Organiser ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल के संदर्भ में टिप्पणी की है। हालांकि, इस शब्द की परिभाषा और इसके राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर भी सार्वजनिक बहस जारी है।
राहुल गांधी की रक्षाबंधन पोस्ट भी बनी सोशल मीडिया बहस
इस बीच रक्षाबंधन के मौके पर राहुल गांधी ने बहन प्रियंका गांधी के साथ तस्वीर साझा कर शुभकामनाएं दी थीं। इसके बाद सोशल मीडिया पर तस्वीर को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि तस्वीर में राहुल गांधी को प्रियंका गांधी से राखी बंधवाते हुए क्यों नहीं दिखाया गया। यह चर्चा उस बयान के बाद और बढ़ी जिसमें शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राहुल गांधी से बहन से राखी बंधवाने और उनकी रक्षा का संकल्प लेने की बात कही थी।
इसके बाद राहुल गांधी का एक पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया गया। हालांकि, रक्षाबंधन की इस तस्वीर को बीजेपी के मौजूदा संगठित सोशल मीडिया अभियान का हिस्सा बताने के लिए अलग से ठोस प्रमाण जरूरी होगा।
बीजेपी की डिजिटल रणनीति में बदलाव के संकेत
बीजेपी के सोशल मीडिया अभियान में आई यह तेजी ऐसे समय दिखाई दे रही है जब पार्टी ने हाल ही में अपने संगठन में बदलाव किया है। लंबे समय तक बीजेपी के आईटी सेल का नेतृत्व करने वाले अमित मालवीय की जगह दीपक महस्के को सोशल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नई रणनीति में राज्य इकाइयों के सोशल मीडिया हैंडल के बीच ज्यादा समन्वय और मीम्स, सटायर तथा मनोरंजन जगत की लोकप्रिय क्लिप के इस्तेमाल पर जोर दिखाई दे रहा है।
कांग्रेस और बीजेपी की डिजिटल लड़ाई और तेज होने के संकेत
भारतीय राजनीति में सोशल मीडिया अब केवल प्रचार का माध्यम नहीं रह गया है। चुनावों के अलावा भी राजनीतिक दल अपने विरोधियों के खिलाफ नैरेटिव बनाने और समर्थकों को जोड़ने के लिए एक्स, इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं।
राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान और उसके जवाब में सामने आई ‘झूठ की गूंज’ वेबसाइट के बाद अब बीजेपी की विभिन्न राज्य इकाइयों की मीम और वीडियो रणनीति ने इस डिजिटल मुकाबले को और तेज कर दिया है।
फिलहाल इस अभियान का मुख्य निशाना राहुल गांधी दिखाई दे रहे हैं। आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से इसका डिजिटल जवाब किस तरह दिया जाता है, यह देखना भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होगा।

