कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुई सभा के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर सियासी विवाद एक बार फिर गरमा गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को इस मुद्दे पर बीजेपी और आरएसएस पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि घटना छुआछूत की मानसिकता को दर्शाती है। राहुल गांधी ने मांग की कि शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी SC/ST Act के तहत FIR दर्ज होनी चाहिए।
यह विवाद हल्द्वानी के रामलीला मैदान से जुड़ा है, जहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 8 अगस्त को एक जनसभा को संबोधित किया था। रिपोर्टों के मुताबिक, दो दिन बाद 10 अगस्त को श्रीराम सेना से जुड़े लोगों ने उसी स्थल पर ‘शुद्धिकरण’ हवन किया था। कांग्रेस ने इसे खरगे की दलित पहचान से जोड़ते हुए जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया है।
राहुल गांधी ने कहा- शुद्धिकरण छुआछूत का दूसरा नाम
राहुल गांधी ने शनिवार को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस मामले को दलित सम्मान और संविधान से जोड़ते हुए कहा कि देश में एक तरफ संविधान और दूसरी तरफ बीजेपी-आरएसएस की विचारधारा के बीच लड़ाई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के दशकों बाद भी दलितों के साथ भेदभाव की घटनाएं सामने आती हैं। राहुल गांधी ने इसी संदर्भ में खरगे की हल्द्वानी सभा के बाद हुए शुद्धिकरण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसके जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले में कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी घटना दलित पहचान के कारण हुई है तो इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए और संबंधित कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
खरगे ने राज्यसभा में उठाया था मुद्दा
इस विवाद को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पहले ही राज्यसभा में उठा चुके हैं। 13 अगस्त को उन्होंने सदन में कहा था कि 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में सभा करने के बाद वहां कथित तौर पर हवन कर ‘शुद्धिकरण’ किया गया।
खरगे ने इसे अपने लिए अपमानजनक बताते हुए सवाल उठाया था कि लोकतंत्र में किसी विपक्षी नेता की सभा के बाद इस तरह की कार्रवाई कैसे स्वीकार की जा सकती है। उन्होंने इसे छुआछूत और दलितों के प्रति भेदभाव से जोड़कर अपनी पीड़ा व्यक्त की थी।
जेपी नड्डा ने कहा था- बीजेपी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती
खरगे के आरोपों पर राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने घटना को दुखद और बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि बीजेपी इस तरह की गतिविधियों का समर्थन नहीं करती और मामले की जांच कराने का भरोसा दिया था।
यानी बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने इस कथित शुद्धिकरण से दूरी बनाई है। हालांकि, उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के बाद के बयान ने इस विवाद को फिर हवा दे दी।
महेंद्र भट्ट ने शुद्धिकरण को लेकर क्या कहा?
उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने 26 अगस्त को शुद्धिकरण का बचाव करते हुए कहा था कि यह कार्रवाई खरगे की जाति के कारण नहीं, बल्कि कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर लगाए गए नारों और राजनीतिक माहौल से जुड़ी थी।
भट्ट ने रामलीला मैदान की धार्मिक महत्ता का हवाला देते हुए कहा कि वहां कथित तौर पर ऐसी गतिविधियां हुईं जिन्हें वह स्थल की पवित्रता के विपरीत मानते हैं। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस ने बीजेपी पर फिर हमला तेज कर दिया।
कांग्रेस ने राज्यपाल से भी जांच की मांग की
विवाद के बीच कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने 24 अगस्त को उत्तराखंड के राज्यपाल से मुलाकात कर हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धिकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। कांग्रेस का कहना था कि पहले जांच का भरोसा दिए जाने के बावजूद मामले में ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
क्या शुद्धिकरण करने वालों पर FIR हुई?
राहुल गांधी के ताजा बयान में FIR दर्ज करने की मांग की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों में इस समय मुख्य रूप से कांग्रेस की कानूनी कार्रवाई की मांग, बीजेपी की शुरुआती असहमति और उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का बाद का बचाव सामने आया है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि SC/ST Act के तहत FIR दर्ज हो चुकी है।
अब विवाद का अगला महत्वपूर्ण पहलू यही है कि संबंधित प्रशासन इस मामले में क्या कानूनी कार्रवाई करता है और कथित शुद्धिकरण में शामिल लोगों की भूमिका जांच में किस तरह सामने आती है।
विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी
हल्द्वानी का यह विवाद अब केवल एक स्थानीय घटना तक सीमित नहीं रहा है। खरगे के आरोप, नड्डा का जांच का आश्वासन, महेंद्र भट्ट का बाद में शुद्धिकरण का बचाव और राहुल गांधी की SC/ST Act के तहत FIR की मांग ने इसे बीजेपी और कांग्रेस के बीच बड़े राजनीतिक विवाद में बदल दिया है।
हालांकि, शुद्धिकरण की कार्रवाई का वास्तविक उद्देश्य क्या था और क्या वह खरगे की जाति से जुड़ी थी, यह जांच का विषय है। कांग्रेस इसे जातिगत भेदभाव बता रही है, जबकि बीजेपी की ओर से इसे राजनीतिक कार्यक्रम और स्थल की धार्मिक मर्यादा से जुड़ा मामला बताया गया है।

