नई दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG इमारत गिरने के मामले में दिल्ली पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक हरिराम बंसल को राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़ लिया है। हादसे के बाद से वह फरार था और पुलिस उसकी तलाश में कई जगहों पर छापेमारी कर रही थी। पुलिस ने उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) भी जारी किया था। हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है।
पुलिस हरिराम को दिल्ली ला रही है। यहां उसका मेडिकल कराया जाएगा और इसके बाद उसे अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस उससे हादसे के बाद फरार होने और इमारत से जुड़े निर्माण या मरम्मत कार्य सहित अन्य पहलुओं पर पूछताछ करना चाहती है। फिलहाल इमारत गिरने की सटीक वजह जांच का विषय है।
10 पुलिस टीमों ने चलाया था सर्च ऑपरेशन
हरिराम की तलाश के लिए दिल्ली पुलिस ने करीब 10 टीमें बनाई थीं। इनमें स्थानीय पुलिस, स्पेशल स्टाफ और ऑपरेशन यूनिट के अधिकारी-कर्मचारी शामिल थे। टीमों ने दिल्ली के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी उसके संभावित ठिकानों पर छापेमारी की।
पुलिस को आशंका थी कि वह दिल्ली-NCR में ही किसी ठिकाने पर छिपा हो सकता है। उसके रिश्तेदारों और करीबी लोगों से भी पूछताछ की गई। बाद में पुलिस को उसके राजस्थान के भिवाड़ी में होने की जानकारी मिली, जहां से उसे पकड़ लिया गया।
हादसे के बाद हरिराम के खिलाफ LOC
बिल्डिंग गिरने के बाद पुलिस ने हरिराम के खिलाफ FIR दर्ज की थी। उसके फरार होने के बाद उसकी तलाश तेज कर दी गई और लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया। पुलिस ने उसकी पहचान और यात्रा संबंधी जानकारी जुटाने के लिए उसके पासपोर्ट डिटेल भी हासिल किए थे।
हरिराम की गिरफ्तारी के बाद अब जांच में यह पता लगाने पर भी जोर रहेगा कि हादसे से पहले इमारत में किस तरह का निर्माण या मरम्मत कार्य चल रहा था और उसकी अनुमति क्या थी।
50 साल से ज्यादा पुरानी थी इमारत
सत्य निकेतन की यह इमारत करीब पांच मंजिला थी और इसमें छात्रों के लिए PG सुविधा चल रही थी। रिपोर्टों के मुताबिक, इमारत कई दशक पुरानी थी। हादसे से पहले इमारत में मरम्मत या निर्माण से जुड़े काम चलने की बात सामने आई है।
स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया कि भारी बारिश के बाद बेसमेंट में पानी जमा हो गया था। हालांकि, पानी जमा होना, बेसमेंट में काम और अन्य निर्माण संबंधी पहलू हादसे की संभावित वजहें हैं; अंतिम कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
इमारत के निर्माण और इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी G+5 संरचना थी, जबकि मूल अनुमति G+1 निर्माण की थी। इस पहलू की भी जांच की जा रही है।
MCD अधिकारियों पर भी कार्रवाई
हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने MCD के पांच अधिकारियों को निलंबित किया है। इनमें दक्षिण क्षेत्र के डिप्टी कमिश्नर के अलावा सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर शामिल हैं।
MCD ने आसपास की खतरनाक इमारतों को लेकर भी कार्रवाई शुरू की है। हादसे के बाद कमजोर पड़ोसी इमारत को सहारा देने के लिए लोहे के जैक लगाए गए हैं और उसे हटाने की प्रक्रिया की जा रही है।
हाईकोर्ट में दाखिल हुई जनहित याचिका
सत्य निकेतन हादसे का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट भी पहुंच गया है। दिल्ली विश्वविद्यालय के कानून के छात्र अनिकेत कुमार गुप्ता की ओर से दाखिल PIL में हादसे की स्वतंत्र जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।
याचिका में मृतकों के परिवारों को प्रत्येक के लिए 1 करोड़ रुपये मुआवजा, घायलों के लिए राहत और दिल्ली के PG, हॉस्टल तथा छात्र आवासों का व्यापक structural safety audit कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि हादसे की वजह का पता लगाने के लिए स्वतंत्र न्यायिक या तकनीकी समिति बनाई जानी चाहिए।
याचिका में यह भी जांचने की मांग की गई है कि इमारत के पास वैध मंजूरी और sanctioned building plan था या नहीं, उसमें अतिरिक्त मंजिल या संरचनात्मक बदलाव किए गए थे या नहीं और PG/हॉस्टल के रूप में उसका इस्तेमाल नियमों के मुताबिक था या नहीं।
हादसे ने दिल्ली के PG और हॉस्टल की सुरक्षा पर उठाए सवाल
सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास छात्रों के लिए PG और हॉस्टल का बड़ा केंद्र है। इस हादसे के बाद सिर्फ एक इमारत की सुरक्षा नहीं, बल्कि दिल्ली के दूसरे छात्र-बहुल इलाकों में पुराने और बदले हुए भवनों की स्थिति पर भी सवाल उठने लगे हैं।
PIL में सत्य निकेतन के अलावा विजय नगर, कमला नगर, मुखर्जी नगर, गांधी विहार, नेहरू विहार, हडसन लेन, गुरमंडी, करोल बाग, ओल्ड राजेंद्र नगर और लक्ष्मी नगर जैसे इलाकों में भी PG और हॉस्टल की सुरक्षा जांच कराने की मांग की गई है।
फिलहाल पुलिस हादसे की जांच के साथ-साथ बिल्डिंग मालिक से पूछताछ की तैयारी कर रही है। हरिराम की गिरफ्तारी के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इमारत में हादसे से पहले क्या काम चल रहा था, उसकी अनुमति थी या नहीं और इस घटना के लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।

