भारतीय स्टेट बैंक (SBI) उन छोटे दुकानदारों और कारोबारियों के लिए एक नया लोन सिस्टम विकसित कर रहा है, जिनके पास जीएसटी रजिस्ट्रेशन नहीं है। बैंक ऐसे कारोबारियों की क्रेडिट एलिजिबिलिटी आंकने के लिए उनके UPI ट्रांजैक्शन के आंकड़ों को बिक्री के संकेतक के तौर पर इस्तेमाल करेगा। मुंबई में शुक्रवार को आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में यह जानकारी एसबीआई के मैनेजिंग डायरेक्टर अश्विनी कुमार तिवारी ने दी।
क्या है नई योजना
तिवारी ने कार्यक्रम में कहा कि अगर किसी कारोबार में यूपीआई के जरिए लगातार और नियमित बिक्री हो रही है, तो उस डेटा को जीएसटी के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने बताया, “अगर यूपीआई के जरिए नियमित बिक्री हो रही है तो यह जीएसटी की जगह ले सकता है। हम बिना जीएसटी वाला यूपीआई समाधान विकसित कर रहे हैं।” ग्राहक की सहमति (कंसेंट) के आधार पर बैंक यूपीआई पेमेंट के अलावा टेलीकॉम कंपनियों से मिलने वाले डेटा जैसे अन्य स्रोतों का भी इस्तेमाल कर सकता है, ताकि उन कारोबारियों की भी क्रेडिट प्रोफाइल तैयार की जा सके जिनकी आय के आंकड़े नियमित रूप से उपलब्ध नहीं होते।
जीएसटी वाले कारोबारियों को पहले से मिल रहा तेज लोन
तिवारी के मुताबिक, जीएसटी रजिस्ट्रेशन, पैन और अन्य जरूरी दस्तावेज रखने वाले कारोबारियों के लिए एसबीआई पहले ही एक ऐसा सिस्टम बना चुका है, जिसके जरिए करीब 10 मिनट के भीतर लोन दिया जा सकता है। बैंक ने पिछले करीब डेढ़ साल (18 महीनों) में जीएसटी और पैन डेटा के आधार पर कुल एक लाख करोड़ रुपये के लोन बांटे हैं। अब चुनौती उन कारोबारियों तक यह सुविधा पहुंचाने की है जो जीएसटी सिस्टम के दायरे में नहीं आते।
डेटा को लेकर क्या दिक्कत है
तिवारी ने यूपीआई डेटा के इस्तेमाल से जुड़ी एक व्यावहारिक चुनौती का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोन देने वाले बैंक के पास हमेशा यह पूरी जानकारी नहीं होती कि यूपीआई के जरिए भेजा गया पैसा असल में कहां जा रहा है, जबकि प्राप्तकर्ता बैंक और लेनदेन में शामिल थर्ड-पार्टी पेमेंट ऐप के पास यह जानकारी मौजूद रहती है। यही वजह है कि सहमति-आधारित मॉडल के जरिए अलग-अलग स्रोतों से डेटा जोड़कर कारोबारी की पूरी तस्वीर बनाने की कोशिश की जा रही है।
अभी लॉन्च की तारीख तय नहीं
एसबीआई ने अभी इस योजना के लिए किसी पायलट क्षेत्र, लोन की सीमा, ब्याज दर या औपचारिक लॉन्च की समयसीमा की घोषणा नहीं की है। बैंक का लक्ष्य है कि जीएसटी रजिस्ट्रेशन के बिना कारोबार करने वाले छोटे व्यापारियों को भी एक ही दिन के भीतर डिजिटल तरीके से लोन उपलब्ध कराया जा सके, हालांकि यह अभी विकास के चरण में है।
पृष्ठभूमि: यूपीआई डेटा और जीएसटी को लेकर पहले भी उठे सवाल
यूपीआई लेनदेन के आंकड़ों का इस्तेमाल कर छोटे व्यापारियों की पहचान करने का मुद्दा नया नहीं है। इससे पहले कर्नाटक में राज्य के वाणिज्यिक कर विभाग ने यूपीआई ट्रांजैक्शन डेटा के आधार पर करीब 14,000 ऐसे कारोबारियों की पहचान की थी, जिनका डिजिटल लेनदेन जीएसटी की तय सीमा से ज्यादा था लेकिन उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ था, जिसके बाद कई छोटे दुकानदारों को टैक्स नोटिस मिले थे। इस घटनाक्रम से कुछ व्यापारियों में यूपीआई से जुड़े डेटा साझा करने को लेकर सतर्कता भी देखी गई थी। हालांकि एसबीआई की मौजूदा पहल का सीधा संबंध उस मामले से नहीं है और यह विशुद्ध रूप से लोन देने के मकसद से, ग्राहक की सहमति पर आधारित एक अलग पहल है।
छोटे कारोबारियों के लिए क्या मायने
अगर यह सिस्टम सफलतापूर्वक लागू होता है, तो उन लाखों छोटे दुकानदारों और कारोबारियों को औपचारिक लोन तक पहुंच आसान हो सकती है, जो अभी जीएसटी रजिस्ट्रेशन न होने के कारण बैंकों से कर्ज लेने में मुश्किलों का सामना करते हैं। हालांकि इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट, डेटा सुरक्षा और सहमति से जुड़े ढांचे का ब्योरा एसबीआई को आगे स्पष्ट करना होगा।

