BRICS समिट में शिरकत करने दिल्ली पहुंचे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, 7 साल बाद भारत की धरती पर रखा कदम

4 Min Read
BRICS समिट में शिरकत करने दिल्ली पहुंचे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, 7 साल बाद भारत की धरती पर रखा कदम

नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स समिट 2026 में शिरकत करने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार सुबह भारत पहुंच गए। उनका विमान दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरा। यह करीब सात साल में जिनपिंग की पहली भारत यात्रा है। जिनपिंग, ब्रिक्स समिट से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे, जिसमें कई अहम मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।

गलवान झड़प के बाद पहला दौरा

गौरतलब है कि 2020 की गलवान झड़प के बाद यह जिनपिंग का पहला भारत दौरा है। इससे पहले वे अक्तूबर 2019 में चेन्नई के पास मामल्लापुरम में मोदी के साथ अनौपचारिक शिखर वार्ता के लिए भारत आए थे। हालांकि इस बीच दोनों नेताओं की विदेशी धरती पर तीन बार मुलाकात हो चुकी है, लेकिन जिनपिंग का दिल्ली आना खास तौर पर अहम माना जा रहा है। भारत मंडपम में प्रधानमंत्री मोदी उनका स्वागत करेंगे और शाम को दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है।

सामान्य होते भारत-चीन संबंधों की पृष्ठभूमि में यात्रा

यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और चीन 2020 की सीमा गतिरोध के बाद संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गश्त को लेकर समझौता, सीधी उड़ानों की बहाली और व्यापारिक वीजा प्रक्रिया को आसान बनाए जाने जैसे कई कदम उठाए जा चुके हैं, जिसने शीर्ष स्तरीय बातचीत की नई शुरुआत के लिए जमीन तैयार की है। भारत मंडपम में होने वाली मोदी-जिनपिंग वार्ता में सीमा प्रबंधन, आर्थिक व व्यापारिक मुद्दों और दोनों देशों के व्यापक कूटनीतिक रिश्तों पर चर्चा होने की उम्मीद है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता के अनुसार, यह लगातार तीसरा साल है जब दोनों नेताओं की मुलाकात होने जा रही है।

जिनपिंग के प्रतिनिधिमंडल में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य काई ची और विदेश मंत्री वांग यी भी शामिल हैं।

चीनी राजदूत ने कही संबंध मजबूत करने की बात

भारत के साथ संबंध मजबूत बनाने के चीन के संकल्प पर जोर देते हुए भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग ने कहा कि चीन दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की ओर से तय किए गए फ्रेमवर्क का पालन करना चाहता है। उन्होंने कहा, “चीन दोनों नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन पर अमल करने, द्विपक्षीय संबंधों को स्ट्रैटेजिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखने, बातचीत बढ़ाने, सहयोग मजबूत करने, मतभेदों को सही ढंग से सुलझाने और अच्छे पड़ोसी व एक-दूसरे की कामयाबी में मददगार साझेदार के रूप में दोस्ती निभाने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेगा।”

ब्रिक्स समिट क्यों है अहम

ब्रिक्स तेजी से उभर रही प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक नीति में तालमेल बिठाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है। यह वह मुख्य मंच है, जहां सदस्य देश वैश्विक गवर्नेंस पर साझा रुख तय करते हैं। लगातार बातचीत के जरिये यह बहुपक्षीय संस्थाओं में ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों को आगे बढ़ाने का एक अहम माध्यम बन गया है। भारत इस वर्ष चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है, और यह वर्ष संगठन की स्थापना के 20 वर्ष पूरे होने का भी प्रतीक है। इस समिट के बाद ब्रिक्स की अध्यक्षता चीन के पास चली जाएगी।

Share This Article
Exit mobile version