UP Politics: सपा के PDA फॉर्मूले को मात देने की तैयारी में BJP, गीता शाक्य को मिली ब्रज क्षेत्र की कमान

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UP: सपा की पीडीए की काट के लिए पिछड़ा वर्ग में संतुलन बना रही भाजपा, गीता को बनाया ब्रज क्षेत्र प्रभारी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अगले चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने संगठन और सामाजिक समीकरणों को साधना शुरू कर दिया है। इसी रणनीति के तहत भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा सांसद और प्रदेश महामंत्री गीता शाक्य को ब्रज क्षेत्र का प्रभारी नियुक्त किया है। पार्टी के इस फैसले को समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की काट के तौर पर देखा जा रहा है।

भाजपा का फोकस खास तौर पर गैर-यादव पिछड़े वर्ग के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने पर है। पार्टी नेताओं का मानना है कि ब्रज क्षेत्र में लोधी समाज से आने वाले क्षेत्रीय अध्यक्ष और शाक्य समाज से आने वाली क्षेत्रीय प्रभारी की जोड़ी संगठन के सामाजिक समीकरणों को मजबूत कर सकती है।

लोधी को अध्यक्ष और शाक्य को प्रभारी बनाकर साधा समीकरण

हालिया संगठनात्मक फेरबदल में भाजपा ने दुर्विजय सिंह शाक्य की जगह पूरन लाल लोधी को ब्रज क्षेत्र का क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया था। इस बदलाव के बाद शाक्य समाज के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर संदेश जाने की आशंका जताई जा रही थी।

ब्रज क्षेत्र और आसपास के जिलों में शाक्य, मौर्य और कुशवाहा जैसे गैर-यादव ओबीसी समुदायों की अच्छी राजनीतिक मौजूदगी है। एटा, बदायूं, मथुरा, आगरा, मैनपुरी, कासगंज, फिरोजाबाद और बरेली जैसे जिलों में इन समुदायों के मतदाता चुनावी समीकरणों को प्रभावित करते हैं।

शाक्य वोट बैंक को लेकर भाजपा ने दिया बड़ा संदेश

दुर्विजय सिंह शाक्य को क्षेत्रीय अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद भाजपा के सामने यह चुनौती थी कि शाक्य समाज के बीच पार्टी की ओर से उपेक्षा का संदेश न जाए। ऐसे में गीता शाक्य को ब्रज क्षेत्र की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

पार्टी के इस फैसले से लोधी और शाक्य, दोनों प्रमुख ओबीसी समुदायों को संगठन में प्रतिनिधित्व देने का संदेश देने की कोशिश की गई है। भाजपा की रणनीति गैर-यादव पिछड़े वर्ग को पार्टी के साथ मजबूती से जोड़े रखने की बताई जा रही है।

सपा के PDA फॉर्मूले की काट की कोशिश

समाजवादी पार्टी लगातार PDA के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। ऐसे में भाजपा का गीता शाक्य को ब्रज क्षेत्र की जिम्मेदारी देना महज संगठनात्मक नियुक्ति के बजाय सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, भाजपा ब्रज क्षेत्र में अलग-अलग ओबीसी समुदायों को संगठन में उचित प्रतिनिधित्व देकर अपने पारंपरिक गैर-यादव पिछड़ा वर्ग वोट बैंक को एकजुट रखने की कोशिश कर रही है। आने वाले समय में पार्टी की यह रणनीति चुनावी मैदान में कितना असर डालती है, यह देखने वाली बात होगी।

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