आगरा में एडीए की अधिगृहीत जमीन 16 लोगों को बेचे जाने का मामला, प्राधिकरण ने अदालत में दायर किया वाद

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आगरा में एडीए की अधिगृहीत जमीन 16 लोगों को बेचे जाने का मामला, प्राधिकरण ने अदालत में दायर किया वाद

आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) की मौजा मोहम्मदपुर स्थित अधिगृहीत भूमि की कथित अवैध खरीद-फरोख्त का मामला सामने आने के बाद प्राधिकरण ने इस पर कार्रवाई शुरू कर दी है। एडीए की जांच में सामने आया है कि यह जमीन अवैध तरीके से 16 अलग-अलग लोगों को बेच दी गई। इसके बाद प्राधिकरण ने इन सभी 16 खरीदारों और संबंधित पक्षकारों के खिलाफ अदालत में सिविल सूट दायर कर दिया है।

क्या है मामला

एडीए के अधिकारियों के अनुसार, मौजा मोहम्मदपुर की यह भूमि पहले ही कानूनी प्रक्रिया के तहत अधिगृहीत की जा चुकी थी और इसका स्वामित्व प्राधिकरण के पास सुरक्षित है। इसके बावजूद, नियमों और सरकारी दिशा-निर्देशों को दरकिनार कर कथित तौर पर एक भूमाफिया ने इस जमीन के छोटे-छोटे हिस्से अलग-अलग लोगों को बेच दिए। प्राधिकरण का कहना है कि खरीदारों में कई रसूखदार और राजनीतिक जुड़ाव रखने वाले लोग भी शामिल हैं, हालांकि इनकी पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

अब इस पूरे मामले में जमीन के मालिकाना हक और वैधानिकता का अंतिम फैसला अदालत में सुनवाई के बाद ही तय होगा। यानी 16 खरीदारों पर लगे आरोप फिलहाल जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में हैं, इन्हें दोषी नहीं माना जा सकता जब तक अदालत कोई निर्णय नहीं देती।

मोहम्मदपुर भूमि विवाद: पुराना और बड़ा मामला

यह ताजा घटनाक्रम आगरा के शास्त्रीपुरम क्षेत्र स्थित मोहम्मदपुर की एडीए भूमि से जुड़े एक बड़े और लंबे विवाद की अगली कड़ी है। इससे पहले सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, सिकंदरा आवासीय योजना के लिए अधिगृहीत की गई इस भूमि का एक हिस्सा 1993 में एक अन्य भूखंड के साथ विनिमय (एक्सचेंज) कर दिया गया था, जिसे 2016 में राजस्व परिषद ने निरस्त कर दिया था। इसके बावजूद जय बजरंग सहकारी आवास समिति से जुड़े मामले में जमीन की अवैध बिक्री का सिलसिला वर्षों तक जारी रहने का आरोप लगा, और मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के बाद प्राधिकरण ने कार्रवाई तेज की थी। इसी कड़ी में इसी वर्ष जून में करीब 46 रजिस्ट्री निरस्त किए जाने और खरीदारों-विक्रेताओं के खिलाफ धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज कराने की तैयारी की खबर भी सामने आई थी।

ताजा मामला इसी बड़े प्रकरण से जुड़ी एक और कड़ी प्रतीत होता है, जिसमें अब 16 अन्य खरीदारों के खिलाफ सिविल सूट दायर किया गया है।

आगे क्या

एडीए प्रशासन का कहना है कि जमीन का स्वामित्व कानूनी रूप से प्राधिकरण के पास सुरक्षित है, इसलिए अदालत में दायर वाद के जरिए इन बिक्री सौदों को चुनौती दी जा रही है। अब इस मामले में अंतिम फैसला अदालती सुनवाई के बाद ही आएगा।

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