लखनऊ: जेम पोर्टल टेंडर के लिए फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र लगाने का मामला, बीएसए ने दो फर्मों के खिलाफ दर्ज कराया केस

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लखनऊ: जेम पोर्टल टेंडर के लिए फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र लगाने का मामला, बीएसए ने दो फर्मों के खिलाफ दर्ज कराया केस

सरकारी टेंडर हासिल करने के लिए फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र और जाली हस्ताक्षर के इस्तेमाल का एक मामला सामने आया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. राकेश सिंह ने इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसमें गोमती नगर, लखनऊ स्थित हरिओम इंटरप्राइजेज के प्रोप्राइटर अनिल कुमार गुप्ता और इंदिरा नगर, लखनऊ स्थित द क्राउन मैनपावर सर्विसेज की प्रोप्राइटर पिंकी को नामजद किया गया है।

कैसे सामने आया मामला

डॉ. राकेश सिंह के अनुसार, सरकारी कार्य और सेवाओं के लिए जेम पोर्टल (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) के जरिये निविदाएं आमंत्रित की जाती हैं, जिनके लिए फर्मों को अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होता है। दोनों फर्मों की ओर से लगाए गए प्रमाण पत्रों की जांच कराई गई, जिसमें कई गंभीर विसंगतियां सामने आईं।

अनिल कुमार गुप्ता ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय, अलीगढ़ का प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था। जब संबंधित कार्यालय से इसकी पुष्टि मांगी गई, तो पता चला कि ऐसा कोई अनुभव प्रमाणपत्र फर्म को जारी ही नहीं किया गया था। प्रमाणपत्र पर किए गए हस्ताक्षर भी संदिग्ध पाए गए।

इसी तरह पिंकी की ओर से प्रस्तुत प्रमाणपत्र में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, बदायूं के नाम से हस्ताक्षर किए गए थे, जो जांच में कॉपी-पेस्ट किए हुए प्रतीत हुए। डॉ. राकेश सिंह ने स्पष्ट किया कि वे कभी बदायूं में तैनात ही नहीं रहे, जबकि प्रमाणपत्र पर उन्हीं के नाम से हस्ताक्षर दर्शाए गए थे। इतना ही नहीं, दोनों फर्मों के प्रमाणपत्रों की क्रमांक संख्या भी एक समान पाई गई, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका और पुख्ता हुई।

पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला

इससे पहले भी डॉ. राकेश सिंह की ओर से इसी तरह की गड़बड़ी सामने लाई गई थी, जब उन्हें हरिओम इंटरप्राइजेज के प्रमाणपत्र पर अपने ही जाली हस्ताक्षर मिलने पर संदेह हुआ था। जांच में पता चला कि इस प्रमाणपत्र में फर्म ने अलीगढ़ के परिषदीय स्कूलों में डेस्क-बेंच आपूर्ति का अनुभव दर्शाते हुए करोड़ों रुपये के काम का दावा किया था। इसके बाद उन्होंने वर्तमान में अलीगढ़ में तैनात बीएसए को पत्र लिखकर स्पष्ट किया था कि प्रमाणपत्र पर मौजूद हस्ताक्षर उनके नहीं हैं।

अधिकारी का कहना

डॉ. राकेश सिंह के अनुसार, दोनों फर्म संचालकों ने शासन को धोखा देकर सरकारी निविदा प्रक्रिया में शामिल होने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया। इसी आधार पर उन्होंने दोनों प्रोप्राइटरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। मामले में आगे की जांच पुलिस स्तर पर की जाएगी, और आरोपों की पुष्टि व दोष तय होना जांच व अदालती प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

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