कौन हैं CBI अफसर सीमा पाहुजा, जिन्हें मिली दिशा सालियान केस की निगरानी की जिम्मेदारी?

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सीमा पाहुजा कौन हैं? दिशा सालियान डेथ केस की निगरानी करेंगी हाथरस-RG कर जांच से जुड़ीं अफसर

दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में सीबीआई ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद एफआईआर दर्ज कर ली है, जिसके साथ छह साल पुराना यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को दिशा सालियान की मौत की जांच सीबीआई को सौंपते हुए स्पष्ट निर्देश दिया था कि जांच की निगरानी किसी अनुभवी और वरिष्ठ सीबीआई अधिकारी के जरिए की जाए। कोर्ट ने मुंबई पुलिस की छह साल तक एफआईआर दर्ज न करने पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि पुलिस की जांच से जवाब से ज्यादा सवाल खड़े होते हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाथरस कांड और कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप-मर्डर केस जैसे बड़े मामलों की जांच से जुड़ी रहीं सीबीआई अधिकारी सीमा पाहुजा को इस केस की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। गौरतलब है कि सीबीआई ने अब तक इस बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, ऐसे में उनकी नियुक्ति की पुष्टि सीबीआई के औपचारिक बयान से होना बाकी है।

सीमा पाहुजा कौन हैं?

सीमा पाहुजा फिलहाल सीबीआई की स्पेशल क्राइम यूनिट में असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) के पद पर तैनात हैं और इससे पहले वह एजेंसी की चंडीगढ़ यूनिट में भी काम कर चुकी हैं। उनके करियर में कई हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील मामलों की जांच शामिल रही है, जिनमें 2020 का हाथरस गैंगरेप-मर्डर केस, उन्नाव रेप केस और कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से जुड़ा रेप-मर्डर केस प्रमुख हैं। इसके अलावा शिमला के चर्चित ‘गुड़िया’ रेप-मर्डर केस की जांच में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी, जिसमें आधुनिक फोरेंसिक तकनीकों के इस्तेमाल के लिए उनकी टीम की सराहना हुई थी। पाहुजा को 2007 से 2018 के बीच दो बार गोल्ड मेडल से सम्मानित किया जा चुका है, वहीं 2021 में उन्हें विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक भी मिला था।

अब तक क्या हुआ है दिशा सालियान केस में

सीबीआई ने दिशा सालियान की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है, जिसमें अब तक किसी को भी नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है। सीबीआई की टीम अब उनकी मौत से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और उपलब्ध सबूतों की दोबारा जांच करेगी। सूत्रों के मुताबिक जांच के शुरुआती चरण में उन लोगों के बयान दर्ज किए जाने की बात सामने आई है, जो 8 जून 2020 की रात दिशा की मौत से पहले हुई एक पार्टी में मौजूद थे। इसके अलावा उस समय की पुलिस जांच, घटनास्थल से जुड़े रिकॉर्ड, फोरेंसिक सामग्री और अन्य उपलब्ध दस्तावेजों की भी समीक्षा की जाएगी। एफआईआर में दिशा के पिता सतीश सालियान के बयान के आधार पर कई नाम दर्ज किए गए हैं, लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक इनमें से किसी को भी स्वतः आरोपी नहीं माना गया है — किसी भी व्यक्ति की भूमिका जांच के दौरान सामने आने वाले सबूतों के आधार पर ही तय होगी।

सीबीआई के सामने चुनौती

दिशा सालियान की मौत को छह साल से ज्यादा समय बीत चुका है, ऐसे में जांच एजेंसी के सामने पुराने सबूतों, रिकॉर्ड और गवाहों से जुड़ी जानकारी को दोबारा खंगालने की बड़ी चुनौती होगी। सीबीआई पहले ही संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि हाईकोर्ट के निर्देश पर तय की गई वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में सीबीआई की जांच छह साल पुराने इस मामले में किन तथ्यों और सबूतों तक पहुंचती है।

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