कानपुर: कानपुर के बहुचर्चित रमईपुर मेगा लेदर क्लस्टर प्रोजेक्ट में कथित करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि वर्ष 2012 से 2016 के बीच करीब 250 निवेशकों से लगभग 32 करोड़ रुपये जमीन खरीदने और लेदर क्लस्टर परियोजना में निवेश के नाम पर लिए गए, लेकिन परियोजना आगे नहीं बढ़ी और निवेशकों को उनका पैसा भी वापस नहीं मिला। अब करीब एक दशक बाद पुलिस ने मामले में सात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज की है।
मामले में निवेशकों की शिकायत के बाद पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने जांच के आदेश दिए थे। करीब एक महीने की जांच के बाद जाजमऊ थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।
2012 से 2016 के बीच जुटाए गए 32 करोड़
निवेशकों की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, रमईपुर में मेगा लेदर क्लस्टर विकसित करने की योजना बनाई गई थी। इसी परियोजना के तहत करीब 250 लोगों से लगभग 32 करोड़ रुपये जुटाए गए।
निवेशकों का आरोप है कि उन्हें परियोजना में जमीन और निवेश के नाम पर रकम लगवाई गई, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि न तो परियोजना का अपेक्षित ढांचा तैयार हुआ और न ही जमीन खरीद से संबंधित स्पष्ट प्रमाण सामने आए।
बताया गया है कि अपशिष्ट निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण वर्ष 2016 में शासन स्तर से परियोजना को बंद कर दिया गया। इसके बाद भी निवेशकों को उनकी रकम वापस नहीं मिली।
न दफ्तर मिला, न कर्मचारी और न जमीन का प्रमाण
निवेशकों के मुताबिक, उन्हें वर्ष 2018 के आसपास परियोजना की वास्तविक स्थिति को लेकर संदेह हुआ। जांच-पड़ताल करने पर कथित तौर पर पता चला कि परियोजना का कोई वास्तविक कार्यालय या कर्मचारी नहीं था।
निवेशकों का यह भी आरोप है कि जिस स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के माध्यम से परियोजना संचालित की जानी थी, उसकी बैठक तक नहीं बुलाई गई। बाद में कथित तौर पर सामने आया कि परियोजना का शेयर केवल सात लोगों के बीच बांट दिया गया था।
इन परिस्थितियों के बाद निवेशकों को अपने साथ धोखाधड़ी होने का अंदेशा हुआ और उन्होंने रकम वापस पाने के लिए पुलिस से शिकायत की।
पुलिस कमिश्नर के पास पहुंचा मामला, फिर शुरू हुई जांच
चेन्नई निवासी सरफराज अख्तर निवेशकों की ओर से मामले को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने करीब एक महीने पहले पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल से शिकायत की थी। इसके बाद मामले की जांच एसीपी कैंट प्रियंका बाजपेई को सौंपी गई।
मंगलवार को करीब 15 से 20 निवेशक एडीसीपी पूर्वी शिवा सिंह से मिलने पहुंचे। इसी दौरान उन्हें बताया गया कि पुलिस की जांच के बाद मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
निवेशकों की मांग है कि उन्हें उनकी पूरी रकम वापस दिलाई जाए। उनका यह भी कहना है कि यदि पैसा लौटाना संभव नहीं है तो उसके बराबर जमीन उपलब्ध कराई जाए।
इन सात लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR
पुलिस ने निवेशकों की तहरीर के आधार पर जिन सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, उनमें शामिल हैं:
- अशरफ रिजवान — हुमैरा टेनरी के संचालक
- शाहिद मकसूद आलम
- अनवरूल हक
- मंसूर अहमद
- फरहान अजमल
- यूसुफ अहमद
- डॉ. शोएब हसन
पुलिस अब मामले में निवेशकों से जुड़े दस्तावेज, रकम के लेन-देन और परियोजना से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
10 साल से ज्यादा समय से पैसे वापसी का इंतजार
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2012-16 के दौरान जुटाई गई करोड़ों रुपये की रकम का क्या हुआ? परियोजना वर्ष 2016 में बंद हो गई, लेकिन निवेशकों के मुताबिक उन्हें आज तक उनका पैसा वापस नहीं मिला।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार, निवेशकों ने उनसे मुलाकात की थी और शिकायत मिलने के बाद जांच कराई गई। अब निवेशकों की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि निवेशकों से जुटाई गई 32 करोड़ रुपये की रकम कहां इस्तेमाल हुई, परियोजना के लिए वास्तव में कितनी जमीन खरीदी गई और कथित तौर पर निवेशकों के साथ किस स्तर पर धोखाधड़ी हुई।

