कारगिल में बादल फटने से अचानक आई बाढ़, कीचड़-पत्थरों के तेज बहाव से मचा हड़कंप; सलाल बांध के गेट भी खुले

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कारगिल के स्टाकपा-संकू में बादल फटने के बाद नाले में आया तेज बाढ़ का पानी

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच अब जम्मू-कश्मीर के कारगिल में बादल फटने से अचानक फ्लैश फ्लड की स्थिति बन गई। कारगिल के स्टाकपा-संकू इलाके में बादल फटने के बाद स्थानीय नाले में अचानक पानी का बहाव तेज हो गया। पानी के साथ भारी मात्रा में कीचड़, बड़े पत्थर और मलबा भी नीचे की ओर बहने लगा। घटना के शुरुआती विवरणों में किसी जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है।

यह घटना 30 अगस्त की रात सामने आई, जब बादल फटने के बाद स्टाकपा-संकू क्षेत्र से गुजरने वाले जलप्रवाह में अचानक उफान आ गया। तेज बहाव और मलबे को देखकर आसपास के लोगों में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। पहाड़ी इलाकों में इस तरह की अचानक आने वाली बाढ़ बेहद तेजी से फैल सकती है, जिससे स्थानीय प्रशासन के लिए चुनौती बढ़ जाती है।

नाले में अचानक आया तेज बहाव

बादल फटने के बाद स्थानीय नाला कुछ ही समय में तेज बहाव वाले जलमार्ग में बदल गया। पानी अपने साथ कीचड़, बड़े-बड़े पत्थर और अन्य मलबा लेकर नीचे की ओर बहता दिखाई दिया। उपलब्ध शुरुआती रिपोर्टों में घटना से हुए नुकसान या किसी व्यक्ति के घायल होने की विस्तृत जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं थी।

स्टाकपा-संकू कारगिल क्षेत्र का पहाड़ी इलाका है और यहां प्राकृतिक जलधाराओं में अचानक पानी बढ़ने पर फ्लैश फ्लड का खतरा रहता है। मौजूदा घटना ने एक बार फिर हिमालयी और पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक होने वाली अत्यधिक बारिश के जोखिम को सामने ला दिया है।

प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों पर बढ़ाई निगरानी

स्थानीय प्रशासन की ओर से स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। संवेदनशील नालों और जलधाराओं पर निगरानी बनाए रखने के साथ लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

हालांकि, यह दावा कि पहले से की गई सफाई या जलधाराओं की क्षमता बढ़ाने के कारण बाढ़ का पानी बिना किसी नुकसान के सिंधु नदी तक पहुंच गया, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है। इसलिए इस पहलू को फिलहाल प्रशासनिक दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

लगातार बारिश से पहाड़ी इलाकों में फ्लैश फ्लड का खतरा

कारगिल में बादल फटने की घटना ऐसे समय हुई है जब जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने भी पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर फ्लैश फ्लड, भूस्खलन और मलबा बहने जैसी स्थितियों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत बताई है। 30 अगस्त को जारी जानकारी के अनुसार, ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार बारिश के चलते रियासी स्थित सलाल बांध में पानी की आवक बढ़ी थी।

सलाल बांध के कई गेट खोले गए

इसी बीच जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में सलाल बांध के कई गेट खोल दिए गए। लगातार बारिश के कारण ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से बांध के जलाशय में पानी की आवक बढ़ गई थी। जलस्तर और बढ़ती आवक को नियंत्रित करने के लिए गेट खोलकर पानी को नियंत्रित तरीके से नीचे की ओर छोड़ा गया।

अधिकारियों के मुताबिक, जलाशय के स्तर और पानी की आवक पर लगातार नजर रखी जा रही है। नदी, नालों और अन्य जलस्रोतों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

हिमालयी क्षेत्र में मौसम की मार

कारगिल में अचानक आई बाढ़ और रियासी में सलाल बांध के गेट खोले जाने की घटनाएं ऐसे समय में सामने आई हैं, जब हिमालयी क्षेत्र के कई हिस्सों में भारी बारिश के कारण अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।

कारगिल की घटना में फिलहाल बड़ी जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन तेज बहाव में पत्थर और मलबा आने से पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक पैदा होने वाले खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रशासन की चुनौती अब संवेदनशील इलाकों में निगरानी बनाए रखने और किसी भी संभावित आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने की है।

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