वैभव सूर्यवंशी ने एक बार फिर भारतीय घरेलू क्रिकेट में इतिहास रच दिया है। 15 साल और 157 दिन की उम्र में उन्होंने दलीप ट्रॉफी इतिहास का सबसे कम उम्र का अर्धशतक जड़कर 57 साल पुराना रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। ईस्ट जोन की ओर से सेंट्रल जोन के खिलाफ सेमीफाइनल में खेलते हुए वैभव ने सिर्फ 42 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया।
बेंगलुरु के बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ग्राउंड-1 में खेले जा रहे मुकाबले में सेंट्रल जोन ने पहली पारी में 266 रन बनाए। इसके जवाब में ईस्ट जोन के लिए वैभव सूर्यवंशी और अभिमन्यु ईश्वरन ने पारी की शुरुआत की। वैभव ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज दिखाया और अपनी तेज बल्लेबाजी से नया रिकॉर्ड बना दिया।
42 गेंदों में फिफ्टी, छक्के के साथ रचा इतिहास
वैभव ने अपना अर्धशतक 42 गेंदों में पूरा किया। उन्होंने छक्का लगाकर पचास रन का आंकड़ा पार किया। इस पारी के साथ ही वह दलीप ट्रॉफी में अर्धशतक लगाने वाले सबसे कम उम्र के बल्लेबाज बन गए।
इससे पहले यह रिकॉर्ड लक्ष्मण सिंह के नाम था। उन्होंने 1969 में 16 साल और 23 दिन की उम्र में दलीप ट्रॉफी में अर्धशतक लगाया था। वैभव ने उनसे करीब 11 महीने कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल की।
इस रिकॉर्ड की सूची में पीयूष चावला का नाम भी शामिल है, जिन्होंने 16 साल और 307 दिन की उम्र में दलीप ट्रॉफी में अर्धशतक बनाया था।
शतक से सिर्फ 8 रन दूर रह गए वैभव
रिकॉर्ड बनाने के बाद भी वैभव ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखी। हालांकि, वह अपने पहले दलीप ट्रॉफी शतक से चूक गए। वैभव 81 गेंदों पर 92 रन बनाकर आउट हुए। उनकी पारी में सात चौके और सात छक्के शामिल रहे।
इस तरह वह शतक से सिर्फ आठ रन दूर रह गए। अगर वैभव इस पारी को शतक में बदल देते, तो वह दलीप ट्रॉफी में सबसे कम उम्र में शतक लगाने के सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड के भी करीब पहुंच जाते। तेंदुलकर ने 1990-91 सत्र में 17 साल और 262 दिन की उम्र में दलीप ट्रॉफी शतक बनाया था।
पहले मैच में बल्ले से नहीं चला था कमाल
दलीप ट्रॉफी के मौजूदा अभियान के अपने पहले मुकाबले में वैभव बल्ले से केवल 8 रन बना सके थे। हालांकि, उन्होंने गेंद से प्रभाव छोड़ा और नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ दूसरी पारी में दो विकेट हासिल किए। ईस्ट जोन ने वह मुकाबला पारी और 210 रन से जीता था।
अब सेंट्रल जोन के खिलाफ सेमीफाइनल में वैभव ने बल्ले से शानदार वापसी करते हुए न केवल बड़ी पारी खेली, बल्कि दलीप ट्रॉफी के इतिहास में अपना नाम भी दर्ज करा दिया है।
15 साल की उम्र में कप्तानी की जिम्मेदारी भी मिली
इस मुकाबले में वैभव की भूमिका सिर्फ बल्लेबाज तक सीमित नहीं रही। नियमित कप्तान ईशान किशन के चोटिल होने के बाद एक समय 15 वर्षीय वैभव ने ईस्ट जोन की कप्तानी की जिम्मेदारी भी संभाली। उन्होंने मैदान पर टीम की कमान संभालते हुए डीआरएस का महत्वपूर्ण फैसला भी लिया, जो सफल रहा।
वैभव की यह पारी इसलिए भी खास है क्योंकि वह अभी बेहद कम उम्र में ही प्रथम श्रेणी क्रिकेट में लगातार अपनी पहचान बना रहे हैं। दलीप ट्रॉफी में 57 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ने के बाद अब उनकी नजरें निश्चित तौर पर अगले बड़े मुकाम पर होंगी।

